१-प्रसिद्ध चिकित्सा शास्त्री पैरासिलीसस ने अपने अनुसंधानों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि कोई व्यक्ति तब बीमार पड़ता है जब उसके वर्तमान नक्षत्र और जन्म नक्षत्र में बीच अंर्तसंबंध बिगड़ जाता है। वे अपने दवा देने से पूर्व अपने मरीजों की जन्मकुण्डली देखा करते थे। उनका कहना था कि जब तक वे ये ना जान लें कि मरीज़ किस नक्षत्र व्यवस्था में पैदा हुआ है उसका अंर्तसंगीत पकड़ना संभव नहीं और बिना अंर्तसंबध जाने वे उसकी गड़बड़ी ठीक नहीं कर सकते। पैरासिलीसस के बारे मशहूर था कि वे ऐसे मरीजों को भी ठीक कर देते थे जिन्हें बड़े से बड़े चिकित्सक भी ठीक नहीं कर पाते थे।
२- ईसा से पांच सौ वर्ष पूर्व यूनान में पाइथागोरस ने प्लेनेटरी हार्मनी (ग्रहीय अंर्तसंगीत) के बहुमूल्य सिद्धांत को जन्म दिया। पाइथागोरस का यह मानना था कि प्रत्येक ग्रह या नक्षत्र जब यात्रा करता है अंतरिक्ष में तो उसकी यात्रा से एक विशेष ध्वनि पैदा होती है। जब कोई मनुष्य जन्म लेता है तब उस जन्म के क्षण में इन नक्षत्रों व ग्रहों के बीच संगीत व्यवस्था है वह उस व्यक्ति के चित्त पर अंकित हो जाती है जो उसे जीवन पर्यंत प्रभावित करती है।
३-सन १९५० में जियाजारजी गिआरडी ने एक नए विज्ञान को जन्म दिया। जिसका नाम है-कास्मिक केमिस्ट्री; ब्रह्माण विज्ञान। इस वैज्ञानिक ने अपने प्रयोगों से इस बात को सिद्ध कर दिया कि समस्त जगत एक आर्गेनिक यूनिटी है। पूरा जगत अंर्तसंबंधित है ठीक शरीर की भांति। जिस प्रकार यदि मनुष्य शरीर के पैर के अंगूठे में चोट लगती है उस चोट के कारण पूरा शरीर प्रभावित होता है ठीक उसी प्रकार यदि ब्रह्माण में कुछ ग्रहों का परिवर्तन होता है तो उससे भी मनुष्य और प्रकृति दोनों प्रभावित होती हैं।
-ज्योतिर्विद हेमन्त रिछारिया
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